क़ानूनी सेवाएँ · Legal
थाई क़ानून सिविल लॉ है — भारत की कॉमन-लॉ आधारित न्यायिक प्रणाली से भिन्न
थाईलैंड की न्यायिक प्रणाली B.E. 2468 के लिखित Civil and Commercial Code पर आधारित है — भारत की तरह बाध्यकारी न्यायिक पूर्वादेश (binding precedent) यहाँ लागू नहीं होते। इसका अर्थ है कि थाई भाषा में लिखित अनुबंध का पाठ ही बैंकॉक सिविल कोर्ट के समक्ष सर्वोच्च संदर्भ है। हम अनुबंधों का मसौदा सटीक थाई क़ानूनी भाषा में तैयार करते हैं, साथ में समानांतर हिन्दी अनुवाद, और मुक़दमे में अंतिम निर्णय तक ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वकीलों और लेखाकारों की टीम द्वारा समीक्षित · अंतिम समीक्षा 8 अक्टूबर 2026
हमारे क़ानूनी विशेषज्ञता क्षेत्र
- वाणिज्यिक क़ानून: कंपनी गठन, शेयरहोल्डर समझौते, M&A
- संपत्ति: 30-वर्षीय दीर्घकालीन पट्टा (नवीनीकरणीय), Superficies, Usufruct, विदेशी भू-स्वामित्व नियंत्रण
- श्रम क़ानून B.E. 2541: नियुक्ति, बर्ख़ास्तगी, धारा 118 के अंतर्गत अनिवार्य क्षतिपूर्ति
- पारिवारिक मामले: अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क़ानून के अनुरूप विवाह, तलाक़, संरक्षण
- हिन्दू उत्तराधिकार: थाई वसीयत का मसौदा जो भारतीय व्यक्तिगत क़ानून को संदर्भित करता है
- वाणिज्यिक मध्यस्थता: THAC और TAI संस्थान
थाई अदालतों में मुक़दमेबाज़ी
बैंकॉक की Civil Court हिन्दी में दायर वादपत्र स्वीकार करती है बशर्ते पंजीकृत वकील द्वारा प्रमाणित थाई अनुवाद संलग्न हो। हम थाई भाषा में वादपत्र तैयार करते हैं, प्रारंभिक सुनवाई में उपस्थित होते हैं, गवाहों से प्रश्न करते हैं और अंतिम बहस प्रस्तुत करते हैं। प्रथम श्रेणी में औसत मुक़दमा अवधि 12-18 माह है।
भारतीय अदालती निर्णयों का थाईलैंड में क्रियान्वयन
भारत और थाईलैंड के बीच पारस्परिक निर्णय-मान्यता संधि नहीं है, परन्तु आप विदेशी निर्णय को महत्त्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए थाई अदालत में नया प्रवर्तन-वाद दायर कर सकते हैं। न्यूयॉर्क कन्वेंशन 1958 के अंतर्गत मध्यस्थता निर्णय सीधे लागू होते हैं — थाईलैंड 1959 से इस संधि का पक्षकार है।